शरण गहें प्रभु कृपा सब कीन्ही॥३५॥
सब जग में तुम अम्बा नाम।
दुर्गा दुर्गति हरहु तमाम॥३६॥
जय जय दुर्गे सुख करनी।
जय जय अम्बे दुःख हरनी॥३७॥
भाव भक्ति जो कोई करे।
सब विपदा उनकी टरे॥३८॥
विनती हमारी यही सुनो।
कष्ट हमारा सब हरो॥३९॥
जय दुर्गे जय जय अम्बे।
कृपा करो माता तुम्हें नमो नमः॥४०॥
॥ दोहा ॥
दुर्गा चालीसा जो गावै, हिय में धरि ध्यान।
मातु दुर्गा की कृपा से, लहै चतुर्विध ज्ञान॥