बुद्धि विवेक दो जन-जन सब॥३५॥
विघ्न विपत्ति मिटावो माता।
ज्ञान प्रदीप जलावो विधाता॥३६॥
जय जय वीणापाणी माता।
जय जय शारदा ज्ञान विधाता॥३७॥
सरस्वती चालीसा जो गावे।
निश्चय बुद्धि विद्या वर पावे॥३८॥
कवित्व शक्ति भी मिले अपारा।
ज्ञान कला का भरे भंडारा॥३९॥
वाग्देवी तुम सबकी माता।
जय जय सरस्वती सुखदाता॥४०॥
॥ दोहा ॥
सरस्वती चालीसा पढ़े, जो कोई शुद्ध मन लाय।
बुद्धि विद्या ज्ञान मिले, कष्ट सकल मिट जाय॥