॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करो, पूरण करो सब आस॥
॥ चौपाई ॥
सिंधु सुता मैं सुमिरों तोहि।
कृपा करहु जननी अब मोहि॥१॥
पद्मासनि पद्मिनी पद्महस्ता।
पद्मसुंदरी हरि प्रियतमा॥२॥
पद्मपत्र लोचनी पद्ममाला।
पद्मामुखी विलसित हैं बाला॥३॥
चतुर्भुजी चार वर दायी।
माँ लक्ष्मी सबकी सुखदायी॥४॥
सुवर्ण वर्ण सौंदर्य निधान।
कमल विराजित सोभा महान॥५॥
स्वर्ण आभूषण सुशोभित अंगा।
कमल पुष्प जग आभा संगा॥६॥
महालक्ष्मी विष्णुप्रिया मातु।
तीनों लोकन की सुखदातु॥७॥
क्षीरसागर विलसित स्थानं।
कमल नयन शुभ शोभा जानं॥८॥
गज वाहिनी अति सुखदाई।
सेवत नर सुख संपत्ति पाई॥९॥
जब जब जन्म विष्णु ने लीन्हा।
तब तब जन्म लक्ष्मी ने कीन्हा॥१०॥
तुम ही जनक सुता सीता बनी।