भूत पिशाच सबै भय खावैं।
शंकर नाम सुनत डर जावैं॥३५॥
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता।
सकल मनोरथ पूरन विधाता॥३६॥
नित्य नेम करि प्रातः ही जावहु।
शिव की कृपा तुरंत ही पावहु॥३७॥
शंकर की महिमा अपरम्पार।
शुभ सुख मंगलकारी सार॥३८॥
शंकर हो तब कृपा तुम्हारी।
भक्ति करैं सब लोक सुधारी॥३९॥
जय जय शिव शंकर आदिदेवा।
आपकी सदा करैं हम सेवा॥४०॥
॥ दोहा ॥
शिव चालीसा जो पढ़े, शुद्ध भाव मन लाय।
सकल मनोरथ पूर्ण हों, शंभु कृपा बरसाय॥