॥ दोहा ॥
नमो विष्णु भगवान को, शंख चक्र गदा धार।
पीताम्बर शोभित करत, कृपा करो संसार॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री हरि विष्णु मुरारी।
सेवत सब सुख मंगलकारी॥१॥
शंख चक्र गदा पद्म विराजे।
चतुर्भुज दिव्य रूप सब साजे॥२॥
पीताम्बर तन सोभित भारी।
वैजयंती माला उर धारी॥३॥
क्षीरसागर जाके धामा।
शेषनाग पर करत विश्रामा॥४॥
लक्ष्मी चरण दबावत जाके।
ब्रह्मा नाभि कमल से आके॥५॥
सुदर्शन चक्र करत रखवारी।
नारद गावत छवि अति प्यारी॥६॥
दश अवतार लिये तुम धारी।
असुर मारि प्रजा प्रतिपारी॥७॥
मत्स्य रूप तुम वेद बचाये।
कूर्म रूप धरि मंदर उठाये॥८॥
वराह रूप धरी धर ऊँचा।
हिरण्याक्ष को मारा सूचा॥९॥
नरसिंह रूप अति भयकारी।
हिरण्यकशिपु मारा दुखहारी॥१०॥
वामन रूप त्रिलोकी नापी।