नित्य पठण
सर्व देवता

भोजन मंत्र

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॥ भोजन पूर्व मंत्र ॥ ॥ भोजन मंत्र (ब्रह्मार्पण) ॥ ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥ (भगवद्गीता ४.२४) ॥ अन्नपूर्णा स्तोत्र ॥ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥ ॥ भोजन पूर्व प्रार्थना ॥ हरिर्दाता हरिर्भोक्ता हरिरन्नं प्रजापतिः। हरिः सर्वशरीरस्थो भुंक्ते भोजयते हरिः॥ ॥ पंचप्राण आहुती ॥ ॐ प्राणाय स्वाहा। ॐ अपानाय स्वाहा। ॐ व्यानाय स्वाहा। ॐ उदानाय स्वाहा। ॐ समानाय स्वाहा। ॐ ब्रह्मणे स्वाहा। ॥ अतिथी देवो भव ॥ अन्नदाता सुखी भव। अतिथिर्देवो भव॥ ॥ भोजनोत्तर मंत्र ॥ अन्नदाता सुखी भव। सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

फायदे

भोजन मंत्र पठणाचे फायदे: • अन्नाप्रती कृतज्ञता व्यक्त होते • भोजन प्रसादरूप होते • पचनक्रिया सुधारते (मानसिक शांतीमुळे) • अन्नदात्याला सुख प्राप्त होते • आध्यात्मिक दृष्टी विकसित होते • दररोज भोजनापूर्वी म्हणावे
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